आज दिनाक 28.07.2017 श्रावण शुक्ल पंचमी तदोपरांत षष्ठी शुक्रवार जिस किसी जातक के घर एवं व्यवसाय व नौकरी इत्यादी में धन आगमन व किसी भी प्रकार का व्यवधान हो या स्त्री से सम्बन्धित किसी प्रकार की समस्या हो वह जातक पंचामृत से भगवान शिव का सह परिवार सहित अभिषेक करें व वेलपत्र समर्पित करें तथा खीर का निवै( अर्पण करें। !! दारिद्रयदहन शिवस्तोत्र् !! का पाठ करें क्रोध का विल्कुल त्याग करें व स्त्रीयों का सम्मान करें। तथा सफेद गाय को मीठा निवै( दें या सफेद वर्फी खिलाऐं।     
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21 अगस्त की रात्रि सूर्य ग्रहण परंतु भारत में नहीं दिखेगा

सोमवार की रात्रि भारतीय समयानुसार 9 बजकर 16 मिनट से लेकर 2 बजकर 34 मिनट तक ग्रहण काल रहेगा। यह सूर्य ग्रहण सिंह राशि, के अधीन मघा नक्षत्र  में घटित होगा। यह भारत के किसी भी भाग में दर्शनीय नहीं होगा अपितु पश्चिमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका,  उत्तर- पष्चिमी अफ्रीका ,प्रशान्त व एटलांटिक महासागर, में दिखेगा। 
ग्रहण का आरंभ 21ः16, खग्रास प्रारंभ-22ः18, परमग्रास- 23ः51, खग्रास समाप्त- 25ः32, ग्रहण समाप्त- 26ः34
क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखेगा ही नहीं, इसलिए इसके सूतक या ज्योतिषीय प्रभाव को कोई औचित्य नहीं बनता। इस रात आप आराम से सोएं।

ज्योतिष के अनुसार 14 अगस्त को ही जन्माष्टमी मनाना रहेगा सार्थक

पुराणों के अनुसार  भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रकृष्ण अष्टमी तिथि बुधवार , रोहिणी नक्षत्र व बृष राशि में अभिजीत मुहूर्त के अधीन हुआ है। ज्योतिषीय योगों के अनुसार यह एक दुर्लभ संयोग होता है, इसीलिए भगवान कृष्ण पूरे संसार में अपनी लीलाओं, गीता ज्ञान और कर्म प्रधान जीवन के लिए आज भी उतने ही सार्थक हैं जितने 5000 साल पूर्व थे। 14 अगस्त सोमवार की सायं अष्टमी सायं 7 बजकर 46 मिनट पर लगेगी और 15 अगस्त मंगलवार, सायं 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। चूंकि भगवान कृष्ण का जन्म रात्रि ठीक 12 बजे माना गया है अतः अर्द्धरात्रि व्यापिनी में ही व्रत रखने को षास्त्रसम्मत माना गया है। कई पुराणों में भी इसी नियम को माना गया है। अतः गृहस्थ लोग अर्थात आम भक्तगण एवं श्रद्धालुजन 14 अगस्त को ही व्रत रखें । इस बार 14 अगस्त  , सोमवार  को स्मार्त अर्थात गृहस्थी लोग जन्माष्टमी मनाएंगे क्योंकि  इस दिन कई दुर्लभ योग हैं । इस लिए, इसी समय, भगवान के निमित्त व्रत, बालरुप पूजा, झूला झुलाना, चंद्र का अघ्र्य, दान, जागरण, कीर्तन आदि का विधान होगा। व्रत एवं उत्सव सोमवार को ही श्रेष्ठ एवं उत्तम माना जाएगा । 15 अगस्त मंगलवार को , उदयकालिक अष्टमी रोहिणी योग होने के कारण  ,वैष्णव यह जन्मोत्सव  इसी दिन मनाएंगे । परंपरानुसार  एवं स्थानीय परिस्थितिवश मथुरा व गोकुल में हर बार की तरह भगवान कृष्ण के जन्म पर नन्दोत्स्व अगले दिन मनाया जा रहा है। भारत के कई नगरों में मथुरा की परंपरा के अनुसार चला जाता है परंतु षुद्ध ज्योतिष के आधार पर ही व्रत एवं महोत्सव मनाने का अपना ही महत्व एवं सार्थकता रहती है। 
क्या है स्मार्त तथा वैष्णव ? 
वेद, श्रुति-स्मृति, आदि ग्रंथों को मानने वाले धर्मपरायण लोग स्मार्त कहलाते हैं। प्रायः सभी गृहस्थी स्मार्त कहलाते हैं। जबकि वे लोग जिन्होंने किसी प्रतिष्ठित  वैष्णव संप्रदाय के गुरु से दीक्षा ग्रहण की हो, दीक्षित हों, कण्ठमाला धारण की हो, किसी प्रकार का तिलक लगाते हों, ऐसे भक्तजन वैष्णव कहलाते हैं। 
व्रत कब और कैसे  रखा जाए?
व्रत के विषय में इस बार किसी प्रकार भी भ्रांति नहीं हैं। फिर भी कई लोग, अर्द्धरात्रि पर रोहिणी नक्षत्र का योग होने पर सप्तमी और अष्टमी पर व्रत रखते हैं। कुछ भक्तगण उदयव्यापिनी अष्टमी पर उपवास करते हैं।  शास्त्रकारों ने व्रत -पूजन, जपादि हेतु अर्द्धरात्रि में रहने वाली तिथि को ही मान्यता दी। विशेषकर स्मार्त लोग अर्द्धरात्रिव्यापिनी अष्टमी को यह व्रत करते हैं। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल,चंडीगढ़ आदि में  में स्मार्त धर्मावलम्बी अर्थात गृहस्थ लोग गत हजारों सालों से इसी परंपरा का  अनुसरण करते हुए सप्तमी युक्ता अर्द्धरात्रिकालीन वाली अष्टमी को व्रत, पूजा आदि करते आ रहे हैं। जबकि मथुरा, वृंदावन सहित उत्तर प्रदेश आदि प्रदेशों में उदयकालीन अष्टमी के दिन ही कृष्ण जन्मोत्सव मनाते आ रहे हैं। भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा की परंपरा को आधार मानकर मनाई जाने वाली जन्माष्टमी के दिन ही  केन्द्रीय सरकार अवकाश की घोषणा करती है। वैष्णव संप्रदाय के अधिकांश लोग उदयकालिक नवमी युता जन्माष्टमी व्रत हेतु ग्रहण करते हैं। सुबह स्नान के बाद ,व्रतानुष्ठान करके ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जाप करें । पूरे दिन व्रत रखें । फलाहार कर सकते हैं। रात्रि के समय ठीक बारह बजे, लगभग अभिजित मुहूर्त में भगवान की आरती करें। प्रतीक स्वरुप खीरा फोड़ कर , शंख ध्वनि से  जन्मोत्सव मनाएं। चंद्रमा को अघ्र्य देकर नमस्कार करें । तत्पश्चात मक्खन, मिश्री, धनिया, केले, मिष्ठान आदि का  प्रसाद ग्रहण करें और बांटें। अगले दिन नवमी पर नन्दोत्सव मनाएं।  
भगवान कृष्ण की आराधना के लिए आप यह मंत्र पढ़ सकते हैं-
ज्योत्स्नापते नमस्तुभ्यं नमस्ते ज्योतिशं पते!
नमस्ते रोहिणी कान्त अघ्र्य मे प्रतिगृह्यताम्!!
स्ंातान प्राप्ति के लिए - 
इस की इच्छा रखने वाले दंपत्ति, संतान गोपाल मंत्र का जाप पति -पत्नी दोनों मिल कर  करें, अवश्य लाभ होगा।
मंत्र है- देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते!
देहिमे तनयं कृष्ण त्वामहं षरणं गतः!!
दूसरा मं़त्र-
! क्लीं ग्लौं श्यामल अंगाय नमः !!
विवाह विलंब के लिए मंत्र है- 
ओम् क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्ल्भाय स्वाहा।
इन मंत्रों की एक माला अर्थात 108 मंत्र कर सकते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष
गीत

तुमसे तन.मन मिले प्राण प्रिय! सदा सुहागिन रात हो गई

होंठ हिले तक नहीं लगा ज्यों जनम.जनम की बात हो गई

 

राधा कुंज भवन में जैसे

सीता खड़ी हुई उपवन में

खड़ी हुई थी सदियों से मैं

थाल सजाकर मन.आंगन में

जाने कितनी सुबहें आईंए शाम हुई फिर रात हो गई

होंठ हिले तक नहींए लगा ज्यों जनम.जनम की बात हो गई

 

तड़प रही थी मन की मीरा

महा मिलन के जल की प्यासी

प्रीतम तुम ही मेरे काबा

मेरी मथुराए मेरी काशी

छुआ तुम्हारा हाथए हथेली कल्प वृक्ष का पात हो गई

होंठ हिले तक नहींए लगा ज्यों जनम.जनम की बात हो गई

 

रोम.रोम में होंठ तुम्हारे

टांक गए अनबूझ कहानी

तू मेरे गोकुल का कान्हा

मैं हूं तेरी राधा रानी

देह हुई वृंदावनए मन में सपनों की बरसात हो गई

होंठ हिले तक नहींए लगा ज्यों जनम.जनम की बात हो गई

 

सोने जैसे दिवस हो गए

लगती हैं चांदी.सी रातें

सपने सूरज जैसे चमके

चन्दन वन.सी महकी रातें

मरना अब आसानए ज़िन्दगी प्यारी.सी सौग़ात ही गई

होंठ हिले तक नहींए लगा ज्यों जनम.जनम की बात हो गई

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You can ask your problems regarding astrolog at +91 9266612000 or you can send your problems on e- mail on info@samacharvarta.com. We will try to solve your issues by our experts.

आज दिनांक 03.08.2017 श्रावण शुक्ल पवित्रा एकादशी गुरूवार
जिस किसी जातक या व्यक्ति के जन्मांक या नवमांस में व्रहस्पति ग्रह वक्री, अस्त या अनिष्ठ स्थान में बैठकर पीड़ाकारी हो वह जातक तुलसी मंजरी से भगवान शिव का पूजन करें तथा 108 तुलसी पत्र से इस मंत्र के द्वारा भगवान विष्णु का पूजन करें उपवास रखें। ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें ऊँ नमों भगवते वाशुदेवाय् क्रोध का त्याग करें। ज्ञात अज्ञात पापों के लिए क्षमा याचना करें।

आज दिनांक 02.08.2017 श्रावण शुक्ल दशमी वुधवार
जिस किसी जातक के जन्म पत्रिका में वुध ग्रह से सम्बन्धित परेशानी हो या बहिन, बुआ मौसी, साली इत्यादी से सम्बान्ध खराब हो या घर में आर्थिक स्थिति ठीक न हो तथा बात बात में सहज क्रोध आता हो वह जातक पंचाम्रत से भगवान शिव के मंत्र का 108 वार जाप करते हुए अभिषेक करें। ऊँ नमों नारायणय् सर्व मनोरथ सि(ी प्राप्त होगी तथा माता व पिता की आज्ञा मानते हुएचरण सेवा करें।

आज दिनाक 28.07.2017 श्रावण शुक्ल पंचमी तदोपरांत षष्ठी शुक्रवार
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अहोई अष्टमी पर कैसे करें पूजा- मदन गुप्ता सपाटू

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अहोई अष्टमी पर कैसे करें पूजा- मदन गुप्ता सपाटू

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मंत्रियों और सांसदों ने की दाती महाराज के कार्यों की सराहना


 
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